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नया धमाका

11/28/2010

अरुंधती ने कहा नेहरू के खिलाफ भी दर्ज करो मुकदमा!

हमारी नेहरू गांधी परिवारों की बंधुआ कांग्रेस और उसके चमचों को अब दुबारा सड़कों पर झण्डे, जूते और नई ईजाद की गई 'फाश कांग्रेसी गालिया' लेकर आज ही नहीं अभी आ जाना चाहिए! क्यों ??? जब कांग्रेसियों की मदर इण्डिया सोनिया गांधी की सच्चाई सामने लाने वाला संघ के पूर्व सरसंघचालक के.सी. सुदर्शन का बयान आया था तो सभी चमचों ने ऐसा ही किया था ना। अब तो उससे भी संगीन बात हो गई है। जानते हो क्या? शनिवार को दिल्ली की एक स्थानीय अदालत द्वारा अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज किये जाने के आदेश के बाद अरुंधती रॉय ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें दिवंगत जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करना चाहिए क्योंकि कश्मीर पर जवाहर लाल नेहरू ने जो कहा था वह भी कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं बताता है. अपने बयान के पक्ष में अरुंधती रॉय ने 11 प्वाइंट के तर्क दिये हैं जो कश्मीर पर जवाहरलाल नेहरू के विभिन्न संदशों, बयानों और टेलीग्राम से लिये गये हैं.
अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में लिखे लेख में अरुंधती रॉय ने 27 अक्टूबर 1947 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को लिखे एक तार का जिक्र करते हुए कहा है कि उस वक्त कश्मीर के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू ने भी यही कहा था कि वे जबर्दस्ती किसी भी राज्य को अपने साथ मिलाने के पक्षधर नहीं है. 31 अक्टूबर 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गये एक और तार का जिक्र किया है जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू लिखते हैं कि "कश्मीर के अधिग्रहण की मांग भारत ने वहां के राजा और प्रतिष्ठित मुस्लिम संगठनों की मांग पर स्वीकार किया है. फिर भी जैसे ही कश्मीर में कानून व्यवस्था बहाल हो जाएगी, कश्मीर के लोग ही अधिग्रहण को जायज या नाजायज ठहराएंगे."
इसी तरह 2 नवंबर 1947 को आल इंडिया रेडियो पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संबोधन का उल्लेख करते हुए अरुंधती रॉय लिखती हैं कि उस दिन नेहरू ने कहा था "ऐसे विषादपूर्ण माहौल में एक क्षण में कोई निर्णय कैसे लिया जा सकता है. यह कश्मीर के लोगों पर निर्भर करता है कि वे क्या निर्णय लेते हैं. आखिरकार निर्णय उन्हें ही लेना है...."21 नवंबर 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था जिसमें एक बार फिर दोहराया था कि कश्मीरी आवाम ही अपना भविष्य तय करेगी. इस पत्र में नेहरू ने लिखा था कि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र जैसी किसी अंतराष्ट्रीय संस्था की निगरानी भी रखी जा सकती है.
पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐसे अनेकों संदर्भों का हवाला देते हुए अरुंधती रॉय ने साबित करने की कोशिश की है कि कश्मीर के मसले पर उन्होंने जो कुछ कहा है वह गलत नहीं है और कहीं से देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता है. ज्ञात हो कि दिल्ली की एक स्थानीय अदालत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया है कि दिल्ली पुलिस अरुंधती रॉय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके इस संबंध में 6 जनवरी तक अदालत को सूचित करे. अरुंधती रॉय पर देशद्रोह का यह मुकदमा दर्ज करने का आदेश उनके उस बयान पर दिया गया है जिसमें उन्होंने कश्मीर को भारत हिस्सा न मानते हुए कहा था कि कश्मीर कभी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है. उन्होंने यह बयान 3 नवंबर को श्रीनगर में दिया था. (साभार विस्फोट.कॉम)

4 टिप्‍पणियां:

  1. अरुंधती, अपने लिये नेहरु के समकक्ष मानती हैं...कमाल है..

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  2. देश के थानों को अरूंधती जैसों की ज़रूरत है जो मुर्दों के ख़िलाफ़ भी एफआईआर दर्ज़ कर सकें!

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  3. कश्‍मीर समस्‍या नेहरूजी की ही पैदा की हुई है इसलिए अरूंधति जैसे लोग भी आज सर उठाने लगे हैं। मजेदार बात तो यह है कि नेहरू ने कश्‍मीर समस्‍या को यूएनओ को दिया और अभी कुछ दिन पहले ही यूएनओ ने कह दिया कि यह समस्‍या उनकी अपनी है वे स्‍वयं तय करें।

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